पौष मास की इस एकादशी का व्रत करें, अवश्य होगी पुत्र प्राप्ति
पुत्र प्राप्ति की कामना है तो एक अद्भुद तिथि-व्रत का वर्णन ब्रह्मवैवर्तपुराण में मिलता है। यह व्रत वर्ष में केवल एक बार आता है। इसे विधि-विधान से कर लिया जाए तो पौराणिक मान्यता है कि पुत्र प्राप्ति निश्चित रूप से होती है।
यह व्रत है शुक्लैकादशी जिसे पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। पौष मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इस एकादशी के व्रत से पुत्र की प्राप्ति होती है। इस संबंध में एक दिव्य कथा भी मिलती है।
कथा यह है कि भद्रावती नाम के नगर में राजा वसु शासन करते थे। पुत्र न होने के कारण राजा वसु और रानी दोनो बहुत मानसिक पीड़ा में रहते थे। दम्पत्ति के मन में सदा यह भाव बना रहता था कि बिना पुत्र के राज्य और वैभव व्यर्थ है, ऐसे में पुत्र प्राप्ति का कोई विधान करना आवश्यक है। इसी विचार में मग्न राजा एक घने जंगल में चले गए जहां पर तमाम तरह के खतरे मौजूद थे। इसी जंगल में राजा ने देखा कि कुछ मुनि एक सरोवर के तट पर अनुष्ठान कर रहे थे। राजा तुरंत उन संतों के पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम करके अपना मनोरथ रख दिया। मुनियों ने राजा को बताया कि आज पुत्रदा एकादशी है। अगर वह इसका व्रत करते हैं तो उन्हें पुत्र की प्राप्ति अवश्य होगी। राजा ने ऐसा ही किया और कालांतर में उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई।
अर्थात जो भी दंपत्ति पुत्र प्राप्ति की कामना करते हैं उन्हें पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का पूरी श्रद्धा के साथ व्रत करना चाहिए।
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