रामलला के ‘कानूनी सिपाही’ का देहावसान
कर्मठ समाजसेवी, विद्वान तथा जुझारू हिंदू नेता मोहनधर दीवान जी का निधन हो गया है। मोहनधर दीवान ने 1959 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। पढ़ाई के बाद बड़ी कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना सारा जीवन हिंदू धर्म, संस्कृति और श्री राम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए सौंप दिया।
विश्व हिंदू परिषद के विश्व समन्वय विभाग में महामंत्री और उपाध्यक्ष के तौर पर उन्होंने अनेक वर्षों तक काम किया। अशोक सिंघल जी ने उन्हें हिंदू -बौद्ध समन्वय की जिम्मेदारी दी थी। उन्हीं के प्रयासों से विश्व हिंदू परिषद के अनेक मंचों पर दलाईलामा के आशीर्वचन करवाए।
श्री राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई के मामले में उन्होंने एक अनोखा काम किया। दिल्ली के लोधी रोड स्थित एक फ्रेंच लाइब्रेरी से 1786 में फ्रेंच भाषा में छपी एक 600 पेज की पुस्तक हिस्ट्री एंड ज्योग्राफी आफ इंडिया’ को उन्होंने ढूंढ निकाला जो कि श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के संबंध में दिए गए 2010 के उच्च न्यायालय और 2019 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हिस्सा बनी। मोहधर को देश और सनातन सेवा का भाव विरासत में मिला था। उनके दादा जी ने पंडित मदन मोहन मालवीय जी के साथ काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के समय धन संग्रह करने में उनके साथ मिल कर योगदान दिया था।
छत्तीसगढ़ के चांपा में मई 1935 में जन्मे मोहनधर जी का निधन दिल्ली स्थित नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में 91 वर्ष की आयु में हुआ।
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