शंकराचार्य के शिष्य ने पूछा ‘सरकार’ से सवाल…. आप धर्म के साथ या नहीं?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य और हिमालय स्थित श्री ज्योतिर्मठ के प्रभारी स्वामी मुकुंदानंद गिरि ने पोप पर डोनल्ड ट्रंप के बयान को लेकर अपनी बात रखी है।मुकुंदानंद गिरि ने कहा है कि जिस तरह से यह घटनाक्रम हुआ है यह बताता है कि धर्म का राजसत्ता से टकराव कोई अनोखी बात नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि धर्म का साथ देने वालों की भी दुनिया में कमी नहीं है। पोप के पक्ष में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की उन्होंने प्रशंसा की है।
प्रत्यक्चैतन्यमुकुंदानंद गिरि ने इंस्ग्राम पर विस्तार से लिखा है। मुंकुंदानंद लिखते हैं कि
“डोनाल्ड ट्रम्प और पोप लिया XIV के बीच विवाद अचानक उभर आया जब ट्रम्प ने पोप को ‘कमजोर’ और ‘भयानक’ कहकर निशाना बनाया। पोप ने हाल ही में युद्ध और हिंसा के खिलाफ शांति की अपील की थी, विशेषकर प्रवासियों और संघर्षों पर अमेरिका की नीतियों को लेकर। ट्रम्प को यह रुख पसंद नहीं आया और उन्होंने सार्वजनिक रूप से पोप पर हमला बोला।इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ट्रम्प की बातें अस्वीकार्य हैं और पोप का संदेश शांति और मानवता के लिए है। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि कैथोलिक चर्च के प्रमुख के रूप में पोप का कर्तव्य है कि वे हिंसा और युद्ध के खिलाफ आवाज उठाएं।इस घटना ने राजनीति और धर्म के बीच तनाव को उजागर कर दिया। ट्रम्प और मेलोनी के बीच यह दरार यूरोप-अमेरिका संबंधों पर भी असर डाल सकती है। जहां ट्रम्प अपने आक्रामक अंदाज़ में बने रहे, वहीं मेलोनी ने पोप के साथ खड़े होकर यह संदेश दिया कि धार्मिक नेतृत्व का सम्मान किया जाना चाहिए”

इस पोस्ट के कैप्शन में उन्होंने लिखा है कि ‘मेलोनी अपने धार्मिक नेतृ्त्व के साथ खड़ी हैं, यहां के पंतप्रधान को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए’
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