सीता स्वयंवर का अद्भुद वर्णन

रामचरित मानस में मिलता है सुंदर वर्णन

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Published On November 26th, 2025 11:03 pm (Updated On November 27, 2025)

चली संग लै सखीं सयानी। गावत गीत मनोहर बानी।।
सोह नवल तनु सुंदर सारी। जगत जननि अतुलित छबि भारी।।

सखियां मनोहर गीत गाते हुए सीता जी को लेकर चलीं। सीता जी के नवल शरीर पर सुंदर साड़ी सुशोभित हो रही है और जगत जननी की अद्भुद छवि दिख रही है।


भूषन सकल सुदेस सुहाए। अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए।।
रंगभूमि जब सिय पगु धारी। देखि रूप मोहे नर नारी।।

सखियों ने सीता जी को आभूषणों से सुसज्जित किया है और प्रत्येक अंग को शोभित कर दिया है।


हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।
पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।

सीता स्वयंवर के अद्भुद दृश्य को देखकर देवता दुंदुभी बजा रहे हैं। अप्सराएं पुष्पवर्षा करके गान कर रही हैं।


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