पुण्य का सागर है वैशाख मास, हो जाइए आराधना में लीन
वैशाख मास का आरंभ हो गया है। यह मास अत्यंत ही शुभ तिथियों, व्रतों एवं पर्वों से युक्त है। सनातन धर्म में वैशाख मास की महिमा अद्वितीय है। इस मास में तीर्थस्थान, पवित्र नदी में स्नान का बड़ा माहात्म्य आध्यात्मिक ग्रंथों में मिलता है।
वैशाख मास में तीन महत्वपूर्ण जयंती मनाई जाती है। पहली जानकी नवमी, दूसरी नृसिंह चतुर्दशी और तीसरी परशुराम जयंती। यही तीनों ही जयंती शुक्लपक्ष में आती हैं।
परशुराम जयंती वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनायी जाती है। श्री जानकी नवमी का पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। नृसिंह जयंती का पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को होता है।
वैशाख मास में ही अक्षय तृतीया पर्व भी आता है जिसमें किया गया पुण्य अक्षय होता है। अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर होता है। इस दिन किए गए दान, स्नान, होम, जप आदि कर्मों के फल अनंत एवं अक्षय होते हैं।
अक्षय तृतीय के अवसर पर ही प्रतिवर्ष उत्तराखंड में भगवान केदारनाथ के कपाट खोले जाते हैं। ऐसे में धार्मिक दृष्टि से यह मास अत्यंत शुभ और पुण्यदायी है।
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