भारत को स्वस्थ रखने का संकल्प: ‘हर मास, एक उपवास’

भारतीयों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए हुआ 'हर मास एक उपवास' कार्यक्रम

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Published On December 14th, 2025 9:37 am (Updated On December 14, 2025)

दिल्ली के भारत मंडपम में स्वास्थ्य को लेकर सबसे अनोखा और अद्भुद कार्यक्रम हुआ। दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन में हर मास एक उपवास का संकल्प लिया गया और लाखों लोग इससे जुड़े। योगऋषि स्वामी रामदेव और जैन संत आचार्य प्रसन्न सागर के मार्गदर्शन में “हर मास एक उपवास” महाभियान की शपथ दिलाई गई। प्रत्येक माह की सातवीं तारीख को उपवास रखने का संकल्प लिया गया, जिससे शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि हो सके।

मुनि प्रसन्न सागर ने उपवास को तन, मन और आत्मा की शुद्धि का सर्वोत्तम साधन बताया। मुनि प्रसन्न सागर ने 557 दिन तक लगातार उपवास किए और अपने जीवन के 18 वर्षों में 3500 से अधिक उपवास सिद्ध कर उपवास शिरोमणि की उपाधि प्राप्त की। इस कार्यक्रम में स्वामी रामदेव ने उपवास के महत्व को साझा करते हुए इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तथ्य बताए। स्वामी रामदेव ने बताया कि वो स्वयं 40 दिनों का उपवास कर चुके हैं।

अंतर्राष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन में एक प्रजेंटेशन भी प्रस्तुत की गई जिसमें यह सिद्ध हुआ है कि उपवास करने से शरीर स्वस्थ होता है और जीवन के साल बढ़ जाते हैं।

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