अखण्ड पुण्यदायक है अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया पर किए गए पुण्य का क्षय कभी नहीं होता

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Published On April 18th, 2026 11:55 pm (Updated On April 18, 2026)

हर मनुष्य चाहता है कि उसके पुण्यों की संख्या ज्यादा हो ताकि लोक के साथ परलोक भी अच्छा बने। परंतु हम जाने-अनजाने में प्रतिदिन न जाने कितने पाप कर बैठते हैं जिससे पुण्य का क्षय होता रहता है। इसी समस्या का सबसे बड़ा समाधान है अक्षय तृतीया का महापर्व। इस दिन किया गया कोई भी पुण्य, किसी भी कारणवश क्षय नहीं होता।

वैशाख शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। सभी मांगलिक कार्यों के लिए यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त भी माना गया है। अक्षय तृतीया पर किया गया तीर्थ स्नान, दान, होम, जप आदि कर्मों पर फल भी अनंत होता है और सभी अक्षय भी हो जाते हैं। इसी कारण इस तिथि को अक्षया भी कहा गया है। सामान्य लोकाचार में हम अक्षय तृतीया कहते हैं।

अक्षय तृतीया पर पूजन विधि

अक्षय तृतीया तिथि को नर-नारायण, परशुराम और हयग्रीव का अवतार हुआ था। इस कारण से अक्षय तृतीया पर देवत्रय पूजा का विधान शास्त्रों में मिलता है। पूजा विधि कहती है कि संकल्प के बाद भगवान का षोडशोपचार पूजन करें। नर-नारायण को भोग में गेंहू का सत्तू, परशुराम को ककड़ी और हयग्रीव को भीगे हुए चने की दाल अर्पित करें।

दान हेतु निर्देश मिलता है कि ग्रीष्म ऋतु में उपयोग की जाने वाली वस्तुएं दान दें। पितृ श्राद्ध करें और ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।

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