माघ मास का सबसे महत्वपूर्ण पर्व संकष्टी चतुर्थी

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Published On January 4th, 2026 4:34 pm (Updated On January 4, 2026)

इस साल 6 जनवरी को संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व को कई जगहों पर सकट चौथ और गणेश चौथ के नाम से भी बुलाया जाता है। कई जगहों पर इसे तिलकुट चतुर्थी व्रत भी कहते हैं।माघ मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को होने वाला यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करने का विधान है। साथ ही तिल से बनी वस्तुओं अथवा तिल-गुड़ से बने लड्डुओं का भोग लगाना चाहिए। इस अवसर पर गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ का विशेष महत्व एवं फल बताया गया है।पूजा के काल को लेकर भी विशेष नियम हैं। भगवान गणेश की अर्चना के साथ चंद्रोदय के समय अर्घ्य देने का विधान है। इस पर्व पर माताएं अपने पुत्रों के कल्याण हेतु यह व्रत करती हैं। इस व्रत में तिल और गुण से मिश्रित एक पर्वत बनाया जाता है और उस पर विभिन्न तरह के फल रखे जाते हैं। अगले दिन सुबह उसी पर्वत को पुत्र पूजन पश्चात हाथ से तोड़ता है और व्रत पूर्ण होता है। हालांकि आध्यात्मिक मान्यताओं के बीच अलग-अलग तरह की परंपरा पूरे देश में देखी जाती है।भगवान गणेश के षोडशोपचार पूजन में क्या क्या होता है वह भी संक्षेप में आपके सामने प्रस्तुत है

षोडशोपचार पूजन को समझिए

आवाहन: देवता को पूजन के लिए आमंत्रण

आसन: विराजमान होने के लिए पुष्प-अक्षत युक्त आसन

पाद्य: चरण धोने के लिए जल अर्पित करना

अर्घ्य: हाथ धोने के लिए चंदन-अक्षत-पुष्प मिश्रित जल अर्पण

आचमन: मुख धोने के लिए जल अर्पण

स्नान: जल से विग्रह स्नानवस्त्र: देवताओं को वस्त्र अर्पण

यज्ञोपवीत: उपवस्त्र या जनेऊ (पुरुष देवताओं के लिए)

गंध: चंदन या सुगंधित द्रव्य अर्पण

अक्षत: चावल अर्पणपुष्प: फूल और माला अर्पण

धूप: धूप दर्शन

दीप: दीपक दर्शन

नैवेद्य: भोग अर्पण

ताम्बूल: पान अर्पण

दक्षिणा/प्रदक्षिणा-नमस्कार: दक्षिणा अर्पण और परिक्रमा

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