दैनिक जीवन में वार (दिन) का महत्व

वार की शुभता और अशुभता का रहस्य

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Published On April 14th, 2026 12:42 pm (Updated On April 15, 2026)

पंचांग 5 तत्वों के समायोजन से बनता है। इन्हीं पांच विषयों की गणना के विशाल ज्योतिषीय विश्लेषण का आधार बनती है।

पंचाग के 5 अंग इस तरह से हैं:-

1- तिथि

2- वार

3- नक्षत्र

4-योग

5- करण

किसी भी व्यक्ति के जीवन में वार का बहुत महत्व है। हर प्रकार के कर्म में वार विचारणीय होता है। वार के संबंध में श्लोक मिलता है कि

शुक्र: शनैश्चरश्चैते वासरा: परिकीर्तिता: ।।

अर्थात आदित्य यानि की रवि, चन्द्रमा यानि कि सोम, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि। यह 7 वार हैं।

वार के संबंध में शुभ-अशुभ का विचार दैनिक जीवन में होता है। इस संबंध में भी ज्योतिषीय ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

गुरुश्चन्द्रो बुध: शुक्र: शुभा वारा: शुभे स्मृता: ।

क्रूरास्तु क्रूरकृत्योषु ग्राह्या भौमार्कसूर्यजा: ।।

अर्थात बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार और शुक्लपक्ष में सोमवार शुभ दिन हैं। इनमें शुभ कार्य सफल होते हैं। वहीं रविवार, मंगलवार और शनिवार को क्रूर वार माना गया है।

अब प्रश्न यह आता है कि अगर कोई काम ऐसा आ जाए कि वह करना आवश्यक है और वार के हिसाब से सही न हो तब क्या करें। इसका संबंध में भी ज्योतिषीय परिहार मिलता है।

न वारदोषा: प्रभवन्ति रात्रौ देवेज्यदैत्येज्यदिवाकराणाम् ।

दिवा शशांकार्कजभूसुतानां सर्वत्र निन्द्यो बुधवारदोष: ।।

शास्त्रकार बताते हैं कि आवश्यक कार्य में रविवार, गुरुवार और शुक्रवार के दिन का दोष रात्रि में नहीं होता है। इस अर्थ यह हुआ कि इनमें जो कार्य दिन में नहीं करने चाहिए वो इन वारों की रात में किया जा सकता है। इसी तरह से सोमवार, शनिवार और मंगलवार को रात्रि में निषिद्ध किए गए कार्य दिन में किए जा सकते हैं। बुधवार का दोष दिन और रात्रि में समान रूप से रहता है।

अब आपको बताते हैं कि किन वारों में कौन से कर्म शुभ बताए गए हैं।

रविवार

राज्याभिषेक, उपचार, सर्जरी, स्वर्ण, लकड़ी, अग्नि, युद्ध से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।

सोमवार

आभूषण, रत्न, संगीत, वस्त्र और बागवानी से कार्य किए जा सकते हैं।

मंगलवार

निवेश, संग्रह, शस्त्र, अग्नि, मूंगा एवं रत्न संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।

बुधवार

अध्ययन, शिल्प कर्म, पुण्य, सेवा, लेखन, संधि, व्यायाम आदि शुभ हैं।

बृहस्पतिवार

धार्मिक कार्य, विद्यालय, मांगलिक उत्सव, वस्त्र, गृह और औषधि से संबंधित कार्य।

शुक्रवार

कृषि, खजाना, भूमि, गोधन, स्त्रियों से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।

शनिवार

गृहप्रवेश, शस्त्र, शीशा, पत्थर और स्थिर श्रेणी के कार्य किए जा सकते हैं।

वारों के संंबंध में और भी व्यापक दिशानिर्देश मिलते हैं जिन्हें आने वाले लेखों में हम आपसे साझा करेंगें।

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