देव भूमि के उत्सव हमारी सांस्कृतिक चेतना के जीवंत उदाहरण हैं 

लेखक डॉ. बृजेश सती चारधाम महासभा के महासचिव हैं

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Published On April 15th, 2026 12:47 pm (Updated On April 15, 2026)

डॉ. बृजेश सती 

देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत स्थानीय गढ़वाली बोली से की और इसके बाद देवताओं का आह्वान किया। उन्होंने चार धाम, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ का स्मरण किया। साथ ही मां डाट काली का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने उत्तराखंड स्थित पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग का उल्लेख करते हुए प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा को भी रेखांकित किया। क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए जहां गढ़वाल के चार धामों की बात कही तो कुमाऊं के आदि कैलाश और ॐ पर्वत का ज्रिक किया। 

 लगभग 20 मिनट तक चले उद्बोधन में उन्होंने नारी शक्ति वंदन विधेयक और भूतपूर्व सैनिकों से जुड़े विषय भी रखे। मगर अधिकांश समय चार धाम, तीर्थ यात्रा, संस्कृति  जैसे बिंदु प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री का एक दिवसीय कार्यक्रम मूल रूप से देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से संबंधित था। मगर प्रधानमंत्री का उद्बोधन चार धाम, चार धाम यात्रा और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर ज्यादा फोकस रहा। 

देहरादून के गढ़ी कैंट में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है। यात्रा पर देश विदेश के श्रद्धालुओं की खास नजर रहती है। 

 देवभूमि के देवताओं का आह्वान करते हुए यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के बाद उन्होंने डाट काली का जिक्र किया। कहा  डाट काली के आशीर्वाद से दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे की सौगात मिली। जिस स्थान से जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उसी के पास संतला देवी का भी प्राचीन मंदिर है। उन्होंने इसका भी उल्लेख किया।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड स्थित पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग को भी नमन किया।

 चार धाम का उल्लेख करते हुए कहा कि चार धाम परियोजनाएं हो या फिर रेल कनेक्टिविटी ।केदारनाथ धाम के लिए रोप वे के साथ ही हेमकुंड साहिब रोप वे निर्माण। उनकी सरकार ने विकास की ऐसी रेखाएं खींची है। जिसको लंबे समय तक याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि देहरादून, ऋषिकेश हरिद्वार के साथ ही उत्तराखंड के चार धामों के लिए दिल्ली एक्सप्रेस वे बहुत मददगार होगा।

उन्होंने सर्दियों में होने वाली शीतकालीन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हर साल यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 

2024 की शीतकालीन यात्रा में यात्रियों की संख्या अस्सी हजार थी। अब यह आंकड़ा डेढ़ लाख तक पहुंच गया है।

 कहा वे 2023 में आदि कैलाश और ॐ पर्वत की यात्रा पर  गए। इसके बाद वहां तीर्थाटन गतिविधि बढ़ी है। पहले यहां सीमित संख्या में लोग जाते थे। अब यह संख्या हजारों में पहुंच गई है।

 उन्होंने कहा  प्रगति, प्रकृति और संस्कृति देव भूमि की धरोहर है। इन स्थानों की पवित्रता बनाए रखना हम सब का दायित्व है। यहां रहने वाले और जो यात्री देश दुनिया से यहां आते हैं। उन सबका यह कर्तव्य है कि पर्यावरण को प्रदूषित न करें।

कहा कि देव भूमि के तीर्थों को स्वच्छ और सुंदर रखें। उन्होंने अगले साल हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि दिव्य और भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़नी है।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में नंदा देवी राज जात यात्रा का भी उल्लेख किया। कहा यह उत्सव हमारी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है। जहां मां नंदा को बेटी मानकर पूरे सम्मान के साथ हिमालय के लिए विदा किया जाता है। इस यात्रा में बहनों और बेटियों की भागीदारी इस धार्मिक आयोजन को खास बनाती है। उन्होंने कहा कि मैं, देश भर की बहन और बेटियों को संदेश देना चाहता हूं कि विकसित भारत के निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका दिखाई देती है।

इसके बाद उन्होंने देवभूमि से नारी शक्ति बंधन अधिनियम के बारे में बोला।

इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण अध्यात्म, धर्म संस्कृति पर  केंद्रित रहा। उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता देते हुए चार धाम यात्रा, शीतकालीन चार धाम यात्रा, हरिद्वार कुंभ और नंदा देवी राज जात जैसे दिव्य आयोजनों का उल्लेख किया।

अक्षय तृतीया से आरंभ हो रही चार धाम यात्रा का जिक्र करते हुए खुद को इस पावन परंपरा से जोड़ा। कुलमिलाकर देव भूमि में प्रधानमंत्री का संबोधन भक्ति, प्रकृति, संस्कृति और जनभावनाओं से जुड़ा नजर आया।

देव भूमि के उत्सव हमारी सांस्कृतिक चेतना के जीवंत उदाहरण हैं 

डॉ बृजेश सती 

देवभूमि उत्तराखंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत स्थानीय गढ़वाली बोली से की और इसके बाद देवताओं का आह्वान किया। उन्होंने चार धाम, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ का स्मरण किया। साथ ही मां डाट काली का आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने उत्तराखंड स्थित पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग का उल्लेख करते हुए प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा को भी रेखांकित किया। क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए जहां गढ़वाल के चार धामों की बात कही तो कुमाऊं के आदि कैलाश और ॐ पर्वत का ज्रिक किया। 

 लगभग 20 मिनट तक चले उद्बोधन में उन्होंने नारी शक्ति वंदन विधेयक और भूतपूर्व सैनिकों से जुड़े विषय भी रखे। मगर अधिकांश समय चार धाम, तीर्थ यात्रा, संस्कृति  जैसे बिंदु प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री का एक दिवसीय कार्यक्रम मूल रूप से देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से संबंधित था। मगर प्रधानमंत्री का उद्बोधन चार धाम, चार धाम यात्रा और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर ज्यादा फोकस रहा। 

देहरादून के गढ़ी कैंट में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है। यात्रा पर देश विदेश के श्रद्धालुओं की खास नजर रहती है। 

 देवभूमि के देवताओं का आह्वान करते हुए यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के बाद उन्होंने डाट काली का जिक्र किया। कहा  डाट काली के आशीर्वाद से दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे की सौगात मिली। जिस स्थान से जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उसी के पास संतला देवी का भी प्राचीन मंदिर है। उन्होंने इसका भी उल्लेख किया।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड स्थित पंच बदरी, पंच केदार और पंच प्रयाग को भी नमन किया।

 चार धाम का उल्लेख करते हुए कहा कि चार धाम परियोजनाएं हो या फिर रेल कनेक्टिविटी ।केदारनाथ धाम के लिए रोप वे के साथ ही हेमकुंड साहिब रोप वे निर्माण। उनकी सरकार ने विकास की ऐसी रेखाएं खींची है। जिसको लंबे समय तक याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि देहरादून, ऋषिकेश हरिद्वार के साथ ही उत्तराखंड के चार धामों के लिए दिल्ली एक्सप्रेस वे बहुत मददगार होगा।

उन्होंने सर्दियों में होने वाली शीतकालीन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हर साल यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 

2024 की शीतकालीन यात्रा में यात्रियों की संख्या अस्सी हजार थी। अब यह आंकड़ा डेढ़ लाख तक पहुंच गया है।

 कहा वे 2023 में आदि कैलाश और ॐ पर्वत की यात्रा पर  गए। इसके बाद वहां तीर्थाटन गतिविधि बढ़ी है। पहले यहां सीमित संख्या में लोग जाते थे। अब यह संख्या हजारों में पहुंच गई है।

 उन्होंने कहा  प्रगति, प्रकृति और संस्कृति देव भूमि की धरोहर है। इन स्थानों की पवित्रता बनाए रखना हम सब का दायित्व है। यहां रहने वाले और जो यात्री देश दुनिया से यहां आते हैं। उन सबका यह कर्तव्य है कि पर्यावरण को प्रदूषित न करें।

कहा कि देव भूमि के तीर्थों को स्वच्छ और सुंदर रखें। उन्होंने अगले साल हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ का जिक्र करते हुए कहा कि दिव्य और भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़नी है।

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड में नंदा देवी राज जात यात्रा का भी उल्लेख किया। कहा यह उत्सव हमारी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उदाहरण है। जहां मां नंदा को बेटी मानकर पूरे सम्मान के साथ हिमालय के लिए विदा किया जाता है। इस यात्रा में बहनों और बेटियों की भागीदारी इस धार्मिक आयोजन को खास बनाती है। उन्होंने कहा कि मैं, देश भर की बहन और बेटियों को संदेश देना चाहता हूं कि विकसित भारत के निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका दिखाई देती है।

इसके बाद उन्होंने देवभूमि से नारी शक्ति बंधन अधिनियम के बारे में बोला।

इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण अध्यात्म, धर्म संस्कृति पर  केंद्रित रहा। उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता देते हुए चार धाम यात्रा, शीतकालीन चार धाम यात्रा, हरिद्वार कुंभ और नंदा देवी राज जात जैसे दिव्य आयोजनों का उल्लेख किया।

अक्षय तृतीया से आरंभ हो रही चार धाम यात्रा का जिक्र करते हुए खुद को इस पावन परंपरा से जोड़ा। कुल मिलाकर देव भूमि में प्रधानमंत्री का संबोधन भक्ति, प्रकृति, संस्कृति और जनभावनाओं से जुड़ा नजर आया।

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