यजुर्वेद का यह सूक्त बच्चों को बना देता है ‘विद्वान’
मेधासूक्त से चमत्कारिक रूप से बढ़ती है बच्चों की मेधाशक्ति (बुद्धि)
वेद हमारा मूल हैं। वेद हमारा अस्तित्व हैं और इसी अस्तित्व को उज्जवल बनाए रखने में वेदोक्त सूक्तियां और मंत्र संंजीवनी की तरह काम करते हैं।
वर्तमान के प्रतिस्पर्धा (competition) के दौर में अभिभावक अपने पुत्र-पुत्रियों के बौद्धिक विकास को लेकर बहुत चिंतित रहते हैं। साथ ही साथ हर हाथ में मोबाइल की उपलब्धता के कारण मेधा शक्ति का ह्रास बड़ी चुनौती बन गया है।
ऐसे में सभी अभिभावकों के लिए हम मेधा सूक्त प्रस्तुत कर रहे हैं। इसका पाठ करके आपके बच्चे अद्भुद प्रतिभा के धनी बन सकते हैं। मेधा सूक्त को हम हिंदी अनुवाद सहित आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है कि इसका प्रयोग आप सब करेंगे और मेधाशक्ति के वरदान का अनुभव करेंगे।
सदसस्पतिमद्भुतं प्रियमिन्द्रस्य काम्यम्।
सनिं मेधामयासिष स्वाहा ।।
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यज्ञशाला के पालक, दिव्य शक्ति से संपन्न, परमेश्वर के प्रिय, काम्य अग्निदेव से मैं ऐश्वर्य तथा धारणावती मेधा की याचना करता हूं। इस निमित्त यह आहुति समर्पित है।
यां मेधां देवगणा: पितरश्चोपासते।
तया मामद्य मेधयाग्ने मेधाविनं कुरु स्वाहा।।
हे अग्निदेव, जो मेधा देवगण और पितृगण के द्वारा पूज्य है, मुझे उस मेधा के द्वारा मेधावी बनाइए। इस निमित्त यह आहुति समर्पित है।
मेधां मे वरुणो ददातु मेधामग्नि: प्रजापति:।
मेधामिन्द्रश्च वायुश्च मेधां धाता ददातु मे स्वाहा।।
वरुण देवता मुझे मेधा प्रदान करें, अग्नि और प्रजापति मुझे मेधा प्रदान करें, इंद्र और वायु मुझे मेधा प्रदान करें। जगत को धारण करने वाले धाता (परमेश्वर) मुझे मेधा प्रदान करें। आप सभी देवताओं के निमित्त यह आहुति समर्पित है।
इदं मे ब्रह्म च क्षत्रं चोभे श्रियमश्नुताम्।
मयि देवा दधतु श्रियमुत्तमां तस्यै ते स्वाहा।।
ब्रह्मज्ञान युक्त वर्ग और क्षत्रिय यानि कि शासक और वीरवर्ग, दोनों मिलकर मेरी लक्ष्मी का उपभोग करें। देवगण मुझे उत्तम ऐश्वर्य प्रदान करें। लक्ष्मी के निमित्त दी गई मेरी यह आहुति आपको समर्पित हो।
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